Sunday, August 30, 2009

साइलीशिया – बायोकेमिक – होमियोपैथिक चिकित्‍सा – औषधि

http://blog.phoenixbkn.com/2009/08/29/साइलीशिया-बायोकेमिक-होम/

सालीशिया फोडे फुन्‍िसयों में पूय पैदा करने अर्थात उन्‍हें पकाने का काम करती है। स्‍नायु मण्‍डल के अति विकसित रोगों में इसका प्रयोग करने से बहुत अच्‍छे परिणाम निकलते है। तीव्र सिरदर्द, जो सिर को कस कर बांधने से कम होता है, रात को सिर पसीने से भीग जाता है, रोगी सिर को अच्‍छी तरह लपेट कर रखना चाहता है, हथेलियों, पैंरो तथा पैर के तलवों में भी अत्‍यधिक पसीना होता है। यह शीत प्रधान रोगियों की एक महान औषधि है।

साइलीशिया की उपयोगिता उन बच्‍चों के लिये अधिक होती है जिन्‍हें दूध पीते ही वमनोद्रेक हो जाता है। इसके साथ ही, कई लोग जीर्ण अग्‍निमान्‍ध के शिकार रहते हैं। उन्‍हें मांस और गर्म भोजन से अत्‍यन्‍त नफरत रहती है, पानी का स्‍वाद भदा लगता है, पानी पीने के बाद वमन हो जाता है, रोगी को अत्‍यन्‍त भूख लगती है और उदर फूला हुआ रहता है आंतों की पक्षाघाती अवस्‍था हो जाती है जिसके फलस्‍वरूप मलबद्धता बनी रहती है मल अत्‍यन्‍त कठोर होता है, मलत्‍याग करते समय बहुत जोर लगाना पडता है।

मासिक धर्म होने पर स्‍ित्रयों को अपना सारा शरीर ठण्‍डा प्रतीत होता है मलबद्धता घेर लेती है और पैरो से दुर्गन्‍धित पसीना निकलता है।

इसकी समीपवर्ती होम्‍योपैथिक औषधियाँ है: मर्क्‍यूरियस, पल्‍साटिल्‍ला और पिकरिड-एसिड

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